द फॉलोअप डेस्क
जीते जी अपनी तेरहवीं कराने वाले शख्स की 2 दिन बाद मौत हो गयी। शख्स ने मरने से पहले 800 लोगों को मृत्यु भोज कराया था। उत्तर प्रदेश के एटा के रहने वाले इस शख्स की मृत्यु और मरने से पहले की गयी तेरहवीं की सभी ओऱ चर्चा हो रही है। खबर है कि इन्होंने तेरहवीं के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन बेची, आमंत्रण के लिए कार्ड बांटे और लगभग 800 लोगों को अपनी तेरहवीं का भोज कराया। उन्होंने अपने जीते जी तेरहवीं के सारे अनुष्ठान पूरे किये। 60 साल के इस शख्स का नाम साधु हाकिम सिंह है। वे चाय की छोटी सी दुकान चलाते थे और लोगों के घर जाकर धार्मिक अनुष्ठान भी कराते थे। साधु हाकिम सिंह सकीट कस्बे के मुंशी नगर मोहल्ले के रहने वाले थे।

मृत्यु से पहले तेरहवीं का कारण
गौरतलब है कि साधु हाकिम सिंह कुल चार भाई थे। एक भाई का देहांत हो चुका है। दो भाई रोजगार के सिलसिले में उत्तर प्रदेश से बाहर रहते हैं। उन्होंने लोगों से बताया था कि परिवार के बाकी के सदस्यों से उनके संबंध अच्छे नहीं है। उनकी मृत्यु के बाद परिवार वाले उनकी तेरहवीं करायेंगे या नहीं, इसे लेकर वे हमेशा संशय और चिंता में रहते थे। इसलिए हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार उन्होंने जीते जी अपनी तेरहवीं के सारे अनुष्ठान पूरे कर लिये। बता दें कि उनकी तेरहवीं में कस्बे के लोगों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंन कार्ड बांटकर अनुनय के साथ लोगों से भोज में शामिल होने का आग्रह किया था।

पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कराया
मिली खबर के मुताबिक, साधु हाकिम सिंह को तेरहवीं के सभी अनुष्ठान पूरा करने के लिए और दान आदि देने के लिए भारी रकम की जरूरत पड़ी। छोटी से चाय दुकान से इतना खर्च कर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था। इसलिए उन्होंने भाइयों से बोलकर पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कराया। अपने हिस्से की जमीन को उन्होंने बेच दिया और मिले पैसे से तेरहवीं का आयोजन कराया। लोगों ने उनकी भावना औऱ विवशता को समझकर इस काम में उनको पूरा सहयोग किया। बहरहाल, दूसरों के घरों में अनुष्ठान कराने वाले हाकिम सिंह की इस तेरहवीं की सभी ओऱ चर्चा हो रही है।
